काशी की गलियों में कदम रखते ही आपको हवा में चंदन और कपूर की महक के साथ ‘हर हर महादेव’ का जयघोष सुनाई देगा, जो आपकी आत्मा को असीम शांति से भर देगा।
शिव की इस नगरी के मंदिर केवल पत्थर की इमारतें नहीं हैं, बल्कि ये हज़ारों वर्षों की आस्था और उस दिव्य ऊर्जा के केंद्र हैं जो हर भक्त को अपनी ओर खींचती हैं।
हमने आपकी सुविधा के लिए काशी के उन 10 महान मंदिरों की सूची तैयार की है, जिनके दर्शन के बिना आपकी वाराणसी की यह यात्रा अधूरी मानी जाती है।
[काशी विश्वनाथ मंदिर, वाराणसी]
काशी का हृदय कहे जाने वाले बाबा विश्वनाथ का यह मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और भव्य कॉरिडोर बनने के बाद इसकी सुंदरता कई गुना बढ़ गई है।
यहाँ की दिव्य मंगला आरती और गंगा के सीधे दर्शन का अनुभव आपको एक अलग ही दुनिया में ले जाएगा, जहाँ केवल अटूट भक्ति और शांति का वास है।
[काल भैरव मंदिर, काशी]
इन्हें ‘काशी का कोतवाल’ कहा जाता है और धार्मिक मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ के दर्शन के बाद काल भैरव जी की अनुमति लेना अत्यंत आवश्यक होता है।
इस मंदिर की ऊर्जा बहुत शक्तिशाली है और यहाँ मिलने वाले काले धागे (गंडा) को सुरक्षा का प्रतीक मानकर भक्त बड़ी श्रद्धा के साथ धारण करते हैं।
[संकट मोचन हनुमान मंदिर, वाराणसी]
गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा स्थापित यह मंदिर भक्तों के कष्ट हरने के लिए प्रसिद्ध है, जहाँ आपको वानरों की चंचलता और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।
हनुमान चालीसा के सस्वर पाठ और यहाँ के शुद्ध देसी घी के बेसन के लड्डुओं का स्वाद आपकी इस यात्रा को हमेशा के लिए यादगार बना देगा।
[माँ अन्नपूर्णा मंदिर, काशी]
बाबा विश्वनाथ मंदिर के ठीक समीप स्थित यह मंदिर माता अन्नपूर्णा को समर्पित है, जिनके बारे में कहा जाता है कि वे काशी में किसी को भी भूखा नहीं सोने देतीं।
माता के स्वर्णमयी रूप के दर्शन करना और यहाँ का पवित्र प्रसाद ग्रहण करना हर श्रद्धालु के लिए परम सौभाग्य की बात मानी जाती है।
[विशालाक्षी शक्तिपीठ, वाराणसी]
गंगा के मीर घाट पर स्थित यह मंदिर देवी सती के 51 शक्तिपीठों में से एक है, जहाँ माता की दिव्य शक्ति का अनुभव हर भक्त को मंत्रमुग्ध कर देता है।
दक्षिण भारतीय वास्तुकला की झलक और यहाँ का आध्यात्मिक वातावरण इस मंदिर को काशी के सबसे पवित्र स्थानों में से एक बनाता है।
[दुर्गा कुंड मंदिर, वाराणसी]
लाल रंग की भव्य नक्काशी वाला यह प्राचीन मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला और पवित्र कुंड के लिए जाना जाता है, जहाँ माता दुर्गा अपने शक्ति स्वरूप में विराजमान हैं।
नवरात्रि के पावन समय में इस मंदिर की रौनक और यहाँ होने वाले विशेष अनुष्ठान आपको काशी की असली शक्ति और गौरवशाली परंपरा का अहसास कराते हैं।
[नया विश्वनाथ मंदिर – BHU, वाराणसी]
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के परिसर में स्थित यह मंदिर सफेद संगमरमर से बना है और इसका शिखर दुनिया के सबसे ऊँचे मंदिरों में गिना जाता है।
यहाँ के विशाल प्रांगण की शांति और दीवारों पर लिखी गीता की आयतें विद्यार्थियों और पर्यटकों के लिए ध्यान लगाने का सबसे उत्तम स्थान हैं।
[तुलसी मानस मंदिर, वाराणसी]
यह मंदिर उस स्थान पर बना है जहाँ तुलसीदास जी ने ‘रामचरितमानस’ की रचना की थी। इसकी दीवारों पर पूरी रामायण सुंदर चित्रों और नक्काशी के साथ उकेरी गई है।
राम-सीता और लक्ष्मण जी की मनमोहक झाँकियाँ देखने के लिए यहाँ देश-विदेश से श्रद्धालु साल भर भारी संख्या में पहुँचते हैं।
[मृत्युंजय महादेव मंदिर, काशी]
काशी के दारानगर में स्थित यह मंदिर ‘अकाल मृत्यु’ के भय को दूर करने के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ एक प्राचीन कुआँ है जिसके जल को औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है।
बीमारियों से मुक्ति और लंबी आयु की कामना के लिए भक्त यहाँ महामृत्युंजय मंत्र का जाप कराते हैं, जो एक अलौकिक शांति प्रदान करता है।
[भारत माता मंदिर, वाराणसी]
यह दुनिया का इकलौता ऐसा मंदिर है जहाँ किसी देवी-देवता की नहीं, बल्कि अखंड भारत के मानचित्र की पूजा की जाती है, जिसे संगमरमर पर उकेरा गया है।
महात्मा गांधी द्वारा उद्घाटित यह मंदिर राष्ट्रभक्ति और एकता का प्रतीक है, जहाँ आप भारत की भौगोलिक सुंदरता को एक ही नज़र में देख सकते हैं।