नया विश्वनाथ मंदिर (BHU) वाराणसी: दर्शन, समय और दुनिया के सबसे ऊंचे मंदिर की गाइड

नया विश्वनाथ मंदिर वाराणसी की उन आधुनिक आध्यात्मिक धरोहरों में से एक है, जहाँ पहुँचते ही आपको शहर के शोर-शराबे से दूर एक असीम शांति और हरियाली का अहसास होता है।

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के विशाल परिसर के बीचों-बीच स्थित यह मंदिर न केवल अपनी भव्यता के लिए जाना जाता है, बल्कि यह महान महामना मदन मोहन मालवीय जी के सपनों का साकार रूप भी है।

आज के इस विशेष लेख में हम जानेंगे कि नया विश्वनाथ मंदिर (BHU VT) के दर्शन का सही समय क्या है, इसकी वास्तुकला की क्या विशेषता है और यहाँ के शांत वातावरण का आनंद आप कैसे ले सकते हैं।

नया विश्वनाथ मंदिर (BHU VT): दर्शन का समय और आध्यात्मिक महत्व

काशी के पुराने मंदिर की तरह ही यह मंदिर भी भगवान शिव को समर्पित है। इसकी नींव स्वयं महामना जी ने रखी थी ताकि समाज के हर वर्ग के लोग बिना किसी भेदभाव के भक्ति का आनंद ले सकें।

मंदिर के कपाट भक्तों के लिए सुबह 4:00 बजे खुल जाते हैं और रात 9:00 बजे तक लगातार दर्शन होते हैं। यहाँ की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यहाँ दोपहर में कपाट बंद नहीं होते, जिससे यात्री कभी भी दर्शन कर सकते हैं।

शाम के समय जब मंदिर के प्रांगण में आरती की ध्वनि गूँजती है और दूधिया रोशनी में सफेद संगमरमर चमकता है, तो वह दृश्य किसी स्वर्ग से कम नहीं लगता। यहाँ का वातावरण आपको ध्यान (Meditation) की ओर प्रेरित करता है।

संगमरमर की कलाकृति और मंदिर का गौरवशाली इतिहास

इस भव्य मंदिर का निर्माण भारत के प्रसिद्ध उद्योगपति बिड़ला परिवार द्वारा कराया गया था, इसलिए इसे ‘बिड़ला मंदिर’ भी कहा जाता है। इसे पूरा होने में लगभग 35 वर्ष का समय लगा था।

मंदिर का शिखर करीब 252 फीट ऊँचा है, जो इसे दुनिया के सबसे ऊँचे मंदिरों में से एक बनाता है। पूरा मंदिर सफेद और ग्रे संगमरमर से बना है, जिस पर भारतीय संस्कृति की झलक साफ़ दिखती है।

मंदिर की दीवारों पर भगवद गीता के श्लोक और हिंदू धर्म के महान ग्रंथों की आयतें बहुत ही खूबसूरती से उकेरी गई हैं। इसे पढ़ना और समझना अपने आप में एक ज्ञानवर्धक अनुभव है।

BHU कैंपस का अनुभव और मंदिर की शांति

नया विश्वनाथ मंदिर तक पहुँचने का रास्ता बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की उन चौड़ी सड़कों और ऊँचे पेड़ों के बीच से होकर गुज़रता है, जहाँ की हवा में एक अलग ही शुद्धता महसूस होती है।

मंदिर के बाहर का लॉन और बगीचा बहुत ही सुंदर है, जहाँ भक्त और विद्यार्थी घंटों बैठकर आध्यात्मिक चर्चा करते हैं या पढ़ाई करते हैं। यहाँ की शांति बनारस की गलियों की भीड़ से बिल्कुल विपरीत और सुकून देने वाली है।

परिसर के अंदर प्रवेश करते ही आपको भगवान शिव के साथ-साथ माता दुर्गा, श्री राम, लक्ष्मी-नारायण और सरस्वती जी के भी भव्य विग्रह देखने को मिलेंगे, जो इसे एक पूर्ण आध्यात्मिक केंद्र बनाते हैं।

मंदिर की भव्य आरती और विशेष उत्सव

मंदिर में होने वाली सुबह की आरती और रात की शयन आरती बहुत ही शांतिपूर्ण होती है। यहाँ आरती के दौरान पुराने मंदिरों जैसी भीड़-भाड़ नहीं होती, जिससे आप एकाग्र होकर महादेव का ध्यान कर सकते हैं।

शिवरात्रि और सावन के महीने में इस मंदिर को फूलों और दीपों से बहुत ही भव्य तरीके से सजाया जाता है। उस समय मंदिर की रौनक कई किलोमीटर दूर से देखी जा सकती है और हज़ारों श्रद्धालु बाबा के जलाभिषेक के लिए आते हैं।

यहाँ के पुजारी बहुत ही सरल स्वभाव के हैं और मंदिर परिसर की स्वच्छता देखते ही बनती है। यहाँ आप बिना किसी हड़बड़ी के बाबा के दर्शन कर सकते हैं और मंदिर की वास्तुकला को निहार सकते हैं।

वाराणसी पहुँचने का मार्ग: ट्रेन और फ्लाइट की सटीक जानकारी

नया विश्वनाथ मंदिर (BHU) पहुँचने के लिए आपका मुख्य रेलवे स्टेशन वाराणसी जंक्शन (BSB) या बनारस स्टेशन (BSBS) होगा। ये दोनों स्टेशन शहर के मुख्य केंद्रों से अच्छी तरह जुड़े हुए हैं।

बनारस की लोकप्रियता को देखते हुए ट्रेनों में टिकट मिलना कठिन होता है। एक सच्चे सलाहकार के तौर पर मेरी बात मानें और अपनी टिकट IRCTC Website पर कम से कम 60 दिन पहले बुक करें।

हवाई सफर करने वाले यात्री लाल बहादुर शास्त्री एयरपोर्ट (VNS) पर उतर सकते हैं। आप [Google Flights] के ज़रिए आसानी से रेट चेक कर सकते हैं और एयरपोर्ट से टैक्सी लेकर सीधे BHU कैंपस पहुँच सकते हैं।

स्थानीय परिवहन: स्टेशन से BHU विश्वनाथ मंदिर कैसे पहुँचें?

वाराणसी स्टेशन से BHU की दूरी लगभग 7 से 8 किलोमीटर है। स्टेशन के बाहर से आपको ‘लंका’ या ‘BHU’ जाने वाले ऑटो और ई-रिक्शा बहुत ही आसानी से मिल जाएंगे।

शेयरिंग ऑटो का किराया ₹30 से ₹50 के बीच होता है। यह सफर आपको बनारस के मुख्य बाज़ारों जैसे सिगरा और रथयात्रा से होकर ले जाएगा, जिससे आपको शहर की एक अच्छी झलक मिल जाएगी।

कैंपस के अंदर ऑटो की अनुमति है, जो आपको मंदिर के बिल्कुल सामने उतार देगा। अगर आप प्रकृति प्रेमी हैं, तो कैंपस के गेट से मंदिर तक पैदल चलना भी एक बहुत ही सुखद अनुभव होता है।

दर्शन के दौरान ध्यान रखने योग्य विशेष बातें

  • [Discipline & Silence]: चूँकि यह एक विश्वविद्यालय परिसर के अंदर है, इसलिए यहाँ शांति और अनुशासन बनाए रखना बहुत आवश्यक है।
  • [Photography]: मंदिर के बाहरी हिस्से और बगीचे में फोटोग्राफी की जा सकती है, लेकिन मुख्य गर्भगृह के अंदर नियमों का पालन करें।
  • [Footwear]: मंदिर के बाहर जूते रखने के लिए एक बहुत ही व्यवस्थित स्टैंड है, जहाँ आप अपना सामान सुरक्षित रख सकते हैं।

BHU की मशहूर ‘कोल्ड कॉफी’ और

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