कोलकाता से वाराणसी कैसे पहुँचें, यह पश्चिम बंगाल और सिटी ऑफ जॉय के उन लाखों श्रद्धालुओं का सबसे प्रमुख सवाल है जो हुगली के तट से निकलकर गंगा के पावन घाटों तक जाना चाहते हैं।
कोलकाता और वाराणसी के बीच का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जुड़ाव इतना गहरा है कि अब ‘वंदे भारत’ जैसी आधुनिक ट्रेनों ने इस लंबी दूरी को बहुत ही सुगम और छोटा बना दिया है।
आज के इस विशेष लेख में हम कोलकाता से वाराणसी जाने के सबसे तेज़ हवाई मार्गों, प्रमुख एक्सप्रेस ट्रेनों और उन ‘बंगाली-काशी टिप्स’ की बात करेंगे जो आपकी यात्रा को सफल बनाएंगे।
कोलकाता से वाराणसी कैसे पहुँचें: हवाई मार्ग और सीधी उड़ान
कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (CCU) से वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री हवाई अड्डे (VNS) के लिए प्रतिदिन कई सीधी उड़ानें उपलब्ध हैं।
हवाई मार्ग उन यात्रियों के लिए सबसे उत्तम विकल्प है जो मात्र 1.15 से 1.30 घंटे के भीतर वाराणसी पहुँचकर शाम की भव्य गंगा आरती में शामिल होना चाहते हैं और समय बचाना चाहते हैं।
फ्लाइट की बुकिंग और किराए की सटीक जानकारी के लिए आप [Google Flights] का सहारा ले सकते हैं, जिससे आप अपनी पूरी यात्रा को कम बजट में समय रहते व्यवस्थित कर पाएंगे।
वाराणसी एयरपोर्ट पर उतरने के बाद आप प्री-पेड टैक्सी या ई-रिक्शा के ज़रिए मात्र 1 घंटे में मुख्य शहर या दशाश्वमेध घाट तक पहुँच सकते हैं और अपनी आध्यात्मिक यात्रा शुरू कर सकते हैं।
रेल मार्ग: हावड़ा और सियालदह से वाराणसी की प्रमुख ट्रेनें
कोलकाता से वाराणसी की रेल यात्रा सबसे लोकप्रिय विकल्प है, क्योंकि यहाँ से ‘हावड़ा-वाराणसी वंदे भारत’ जैसी प्रीमियम ट्रेनें अब काशी के सफर को बहुत ही आरामदायक बना चुकी हैं।
हावड़ा जंक्शन (HWH) और सियालदह से ‘विभूति एक्सप्रेस’, ‘अमृत भारत एक्सप्रेस’ और ‘हावड़ा-वाराणसी वंदे भारत’ (22345) प्रमुख हैं, जो आपको सुरक्षित तरीके से काशी पहुँचाती हैं।
ट्रेनों में सीटों की उपलब्धता और समय की जाँच के लिए आप IRCTC Website का उपयोग करें और अपनी टिकट यात्रा से ठीक 60 दिन पहले ही बुक कर लें।
यदि आप बजट यात्रा करना चाहते हैं, तो ‘कोलकाता-गाजीपुर सिटी एक्सप्रेस’ या ‘दुन एक्सप्रेस’ जैसे विकल्प भी मौजूद हैं जो हर वर्ग के यात्रियों के लिए बहुत ही सुलभ और समयबद्ध हैं।
सड़क मार्ग: कोलकाता से वाराणसी की एक ऐतिहासिक रोड ट्रिप
यदि आप अपनी निजी कार या बस से यात्रा करना पसंद करते हैं, तो कोलकाता से वाराणसी की दूरी लगभग 680 किलोमीटर है, जिसे आप नेशनल हाईवे (NH-19) के जरिए तय कर सकते हैं।
आप वर्धमान, आसनसोल और धनबाद होते हुए वाराणसी पहुँच सकते हैं। इस यात्रा में लगभग 12 से 14 घंटे लगते हैं, और रास्ते में ‘वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे’ का काम भी तेज़ी से चल रहा है।
पश्चिम बंगाल, झारखंड और उत्तर प्रदेश के चौड़े हाईवे आपकी इस लंबी यात्रा को सुखद बना देते हैं, जहाँ आप रास्ते में प्रकृति और बदलते ग्रामीण भारत के सुंदर नज़ारे देख सकते हैं।
सड़क मार्ग का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप अपनी सुविधा के अनुसार कहीं भी रुक सकते हैं और रास्ते में पड़ने वाले ढाबों के विविध और स्थानीय स्वादों का भरपूर आनंद ले सकते हैं।
कोलकाता के यात्रियों के लिए जरूरी और स्थानीय सुझाव
कोलकाता से वाराणसी आने वाले श्रद्धालुओं को यह ध्यान रखना चाहिए कि काशी की गलियां बहुत संकरी और भीड़भाड़ वाली हो सकती हैं, इसलिए यहाँ पैदल चलने के लिए तैयार रहें।
वाराणसी में अब सुरक्षा व्यवस्था बहुत कड़ी है, इसलिए अपना आधार कार्ड या कोई भी वैध पहचान पत्र हमेशा साथ रखें, विशेषकर मंदिर के मुख्य परिसर और कॉरिडोर में प्रवेश के समय।
कोलकाता के आर्द्र (Humid) मौसम के आदी लोगों को वाराणसी की सूखी गर्मी और सर्दियों की तीखी ठंड से थोड़ा सावधान रहना चाहिए, इसलिए मौसम के अनुसार ही अपने कपड़े साथ लाएं।
यदि आप प्रसिद्ध ‘गंगा आरती’ देखना चाहते हैं, तो शाम होने से कम से कम 1 घंटा पहले घाट पर पहुँचकर अपनी जगह सुरक्षित कर लें ताकि आप इस दिव्य दृश्य को करीब से देख सकें।
स्थानीय स्वाद: कोलकाता के संदेश-रसगुल्ले से काशी की कचौड़ी तक
कोलकाता के मीठे ‘रसगुल्ले’ और फिश-करी के शौकीन जब वाराणसी पहुँचते हैं, तो यहाँ की सुबह की ‘बेरही कचौड़ी’ और ताजी जलेबी का नाश्ता उन्हें एक अलग ही आध्यात्मिक तृप्ति प्रदान करता है।
वाराणसी की गलियों में मिलने वाली ‘मलइयो’ (सर्दियों में) और ‘रबड़ी-लस्सी’ का स्वाद पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है, जो आपकी पूरी यात्रा की थकान को कुछ ही पलों में पूरी तरह से मिटा देता है।
बाबा विश्वनाथ के दर्शन के बाद वहां मिलने वाले विशेष ‘बनारसी पान’ का आनंद लेना न भूलें, क्योंकि इसके बिना आपकी काशी की यात्रा को परंपरा के अनुसार अधूरा माना जाता है।
रात के समय घाटों के पास मिलने वाली गरमा-गरम चाय और सोंधे ‘मलाईदार दूध’ का स्वाद लेना एक ऐसा अनुभव है जो आपको कोलकाता के पार्क स्ट्रीट के किसी भी रेस्तरां में नहीं मिलेगा।
वाराणसी में स्थानीय परिवहन: ई-रिक्शा और दिव्य गंगा नाव
वाराणसी पहुँचने के बाद आपको शहर के अंदर घूमने के लिए किसी बड़ी गाड़ी की कमी नहीं खलेगी। यहाँ का सबसे सुलभ और पर्यावरण के अनुकूल साधन ‘ई-रिक्शा’ है जो हर जगह उपलब्ध है।
ई-रिक्शा वाले भैया आपको मात्र ₹10-20 में प्रमुख मंदिरों तक पहुँचा देते हैं और साथ ही वाराणसी के अनसुने पौराणिक किस्से भी सुनाते हैं, जो आपकी यात्रा को और भी रोचक बना देते हैं।
गंगा नदी में ‘नाव की सवारी’ (Boat Ride) करना एक जादुई अनुभव है। विशेषकर सुबह के समय घाटों की भव्यता और पूजा-अर्चना का दृश्य देखना आपकी आत्मा को असीम शांति प्रदान करता है।
कोशिश करें कि आप ‘काशी विश्वनाथ कॉरिडोर’ के नए और भव्य स्वरूप को पैदल चलकर महसूस करें। वहां की नक्काशी और आध्यात्मिक ऊर्जा आपको भक्ति के एक अलग ही संसार में ले जाएगी।
Disclaimer: ट्रेनों के समय, बस के किराए और सड़क मार्ग की स्थितियों में प्रशासन द्वारा बदलाव संभव है। यात्रा की योजना बनाने से पहले आधिकारिक स्रोतों से जानकारी की पुष्टि अवश्य करें।