शारदीय नवरात्रि और दुर्गा पूजा हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में से हैं। इन दिनों मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा, व्रत, पाठ, कन्या पूजन और हवन जैसी धार्मिक परंपराएं निभाई जाती हैं। अलग-अलग राज्यों, शहरों और परिवारों में पूजा की तिथियों, विधियों और परंपराओं में कुछ अंतर हो सकता है।
अगर आप जानना चाहते हैं कि दुर्गा पूजा 2026 कब है, शारदीय नवरात्रि कब शुरू होगी, घटस्थापना का मुहूर्त क्या है, घर पर पूजा कैसे करें और पूजा के लिए किन चीजों की आवश्यकता होगी, तो इस लेख में आपको इसकी सरल और उपयोगी जानकारी एक जगह मिलेगी।
त्वरित उत्तर: दुर्गा पूजा 2026 कब है?
वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि और घटस्थापना 11 अक्टूबर 2026, रविवार से शुरू होगी। वाराणसी के पंचांग के अनुसार इसी दिन मुख्य घटस्थापना मुहूर्त सुबह 5:54 बजे से 9:48 बजे तक है। अभिजित मुहूर्त सुबह 11:21 बजे से दोपहर 12:08 बजे तक है। स्थानीय शहर के अनुसार मुहूर्त में अंतर हो सकता है।
एक जरूरी बात: नवरात्रि और दुर्गा पूजा में अंतर
शारदीय नवरात्रि पूरे भारत में देवी उपासना से जुड़ा नौ रातों का प्रमुख पर्व है, जबकि दुर्गा पूजा विशेष रूप से पश्चिम बंगाल, असम, ओडिशा और कुछ अन्य क्षेत्रों में अपनी अलग क्षेत्रीय परंपराओं और पूजा-दिवसों के साथ मनाई जाती है।
इस लेख में मुख्य रूप से काशी/उत्तर भारत में प्रचलित शारदीय नवरात्रि और सामान्य दुर्गा पूजा परंपराओं को ध्यान में रखा गया है। यदि आप पश्चिम बंगाल या किसी अन्य क्षेत्र में पूजा कर रहे हैं, तो वहां की स्थानीय पंचांग परंपरा को अंतिम आधार मानें।
इस लेख का दायरा: यहां सामान्य शारदीय नवरात्रि, घटस्थापना और दुर्गा पूजा की पूजा-पद्धति दी गई है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में पूजा की विधि, मुहूर्त, व्रत और धार्मिक परंपराओं में अंतर हो सकता है।
दुर्गा पूजा 2026 कब है?
वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026, रविवार से होगी। इसी दिन घटस्थापना या कलश स्थापना की जाती है।
शारदीय नवरात्रि नौ रातों तक चलने वाला प्रमुख देवी पर्व है, जिसके बाद दशमी को विजयादशमी मनाई जाती है। नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है।
वाराणसी के पंचांग के अनुसार 11 अक्टूबर को प्रतिपदा तिथि के दौरान घटस्थापना की जाएगी। प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर 2026 की रात 9:19 बजे से 11 अक्टूबर 2026 की रात 9:30 बजे तक रहेगी।
शारदीय नवरात्रि 2026 की प्रमुख तिथियां
| पर्व | तारीख | दिन |
|---|---|---|
| शारदीय नवरात्रि एवं घटस्थापना | 11 अक्टूबर 2026 | रविवार |
| दुर्गा अष्टमी / महानवमी | 19 अक्टूबर 2026 | सोमवार |
| विजयादशमी / दशहरा | 20 अक्टूबर 2026 | मंगलवार |
ऊपर दी गई तिथियां काशी/उत्तर भारत के सामान्य शारदीय नवरात्रि संदर्भ में दी गई हैं। विशेष रूप से बंगाल और कुछ अन्य क्षेत्रों में दुर्गा पूजा के मुख्य दिनों और विसर्जन की स्थानीय परंपरा अलग हो सकती है। इसलिए स्थानीय पंचांग को अंतिम आधार मानना बेहतर है।
घटस्थापना क्या है?
घटस्थापना शारदीय नवरात्रि की शुरुआत में किया जाने वाला प्रमुख अनुष्ठान है। इसमें कलश स्थापित करके मां दुर्गा और देवी शक्ति का आह्वान किया जाता है।
आमतौर पर पूजा स्थान को साफ करके वहां चौकी या वेदी बनाई जाती है। कलश में जल भरकर उसके ऊपर आम या परंपरा में प्रयुक्त अन्य पत्ते और नारियल रखा जाता है। कई परिवार कलश के पास मिट्टी में जौ भी बोते हैं, जिन्हें नवरात्रि के दौरान उगते हुए देखा जाता है।
घटस्थापना की सही विधि परिवार की परंपरा, क्षेत्रीय पद्धति और संबंधित धार्मिक परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।
दुर्गा पूजा और घटस्थापना के लिए आवश्यक सामग्री
घर पर सामान्य रूप से पूजा करने के लिए सामग्री पहले से तैयार रखना सुविधाजनक रहता है।
कलश स्थापना के लिए
- पूजा का कलश
- स्वच्छ जल
- आम के पत्ते
- नारियल
- रोली या कुमकुम
- अक्षत
- मौली या कलावा
- फूल
- दूर्वा, जहां परंपरा में प्रयोग होती हो
- सुपारी
- सिक्का
- पंचामृत की सामग्री
- जौ और मिट्टी, यदि जौ बोने की पारंपरिक विधि अपनाई जाती हो
मां दुर्गा की पूजा के लिए
- देवी मां की प्रतिमा या चित्र
- लाल या पीले रंग का वस्त्र
- फूल और माला
- धूप
- दीपक
- घी या तेल
- कपूर
- चंदन
- सिंदूर
- कुमकुम
- अक्षत
- फल
- मिठाई या भोग
- पान और सुपारी
- नारियल
- पूजा की थाली
नवरात्र पूजा किट का विकल्प
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घटस्थापना 2026 का मुहूर्त
घटस्थापना को कलश स्थापना भी कहा जाता है। यह शारदीय नवरात्रि के आरंभ का महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है, जिसमें कलश स्थापित करके देवी शक्ति का आह्वान किया जाता है।
वाराणसी के लिए 11 अक्टूबर 2026 का घटस्थापना मुहूर्त
- तारीख: 11 अक्टूबर 2026, रविवार
- मुख्य घटस्थापना मुहूर्त: सुबह 5:54 बजे से 9:48 बजे तक
- अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:21 बजे से दोपहर 12:08 बजे तक
- प्रतिपदा तिथि: 10 अक्टूबर रात 9:19 बजे से 11 अक्टूबर रात 9:30 बजे तक
ये समय वाराणसी के स्थानीय पंचांग के अनुसार हैं। मुहूर्त स्थानीय सूर्योदय, सूर्यास्त और अन्य पंचांग गणनाओं पर निर्भर करता है। इसलिए वाराणसी का समय मुंबई, दिल्ली, कोलकाता या किसी अन्य शहर में बिल्कुल समान नहीं माना जाना चाहिए।
उदाहरण के लिए, 11 अक्टूबर 2026 को Navi Mumbai के लिए Drik Panchang अलग घटस्थापना समय सुबह 6:31 बजे से 10:27 बजे तक देता है। इससे स्पष्ट है कि स्थान बदलने पर मुहूर्त भी बदल सकता है।
इसलिए पूजा के अंतिम समय की पुष्टि अपने शहर के स्थानीय पंचांग से करें।
घर पर दुर्गा पूजा कैसे करें?
घर पर दुर्गा पूजा करते समय सबसे महत्वपूर्ण बात श्रद्धा, स्वच्छता और अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा करना है। सामान्य रूप से पूजा का क्रम इस प्रकार रखा जा सकता है:
1. पूजा स्थान की सफाई करें
सबसे पहले पूजा के स्थान को अच्छी तरह साफ करें। चौकी या पूजा वेदी को स्वच्छ कपड़े से ढकें और मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
2. संकल्प लें
पूजा शुरू करने से पहले अपने परिवार और अपनी श्रद्धा के अनुसार संकल्प लें। संकल्प में पूजा का उद्देश्य, तिथि और अपना नाम आदि लिया जा सकता है।
3. कलश की स्थापना करें
निर्धारित स्थानीय मुहूर्त में कलश स्थापित करें। कलश में जल भरकर उसमें परंपरा के अनुसार आवश्यक सामग्री डालें और ऊपर नारियल स्थापित करें। यदि आपके परिवार में जौ बोने की परंपरा है तो कलश के पास मिट्टी में जौ बोएं।
4. गणेश जी का पूजन करें
किसी भी शुभ धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत भगवान गणेश के पूजन से करना सामान्य हिंदू परंपरा है। गणेश जी को जल, अक्षत, फूल, दूर्वा और नैवेद्य अर्पित करें।
5. मां दुर्गा का पूजन करें
मां दुर्गा को फूल, माला, रोली, कुमकुम, चंदन और अक्षत अर्पित करें। इसके बाद धूप और दीप जलाकर देवी की आरती करें।
6. मंत्र और पाठ करें
अपनी श्रद्धा और समय के अनुसार दुर्गा मंत्र, दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जा सकता है। यदि पूरा पाठ करना संभव न हो तो नियमित रूप से देवी का स्मरण, मंत्र-जप और आरती भी की जा सकती है।
7. भोग लगाएं
मां को फल, मिठाई या अपनी परंपरा के अनुसार सात्त्विक भोग अर्पित करें। भोग में वही सामग्री रखें जिसे आपके परिवार की धार्मिक परंपरा में स्वीकार किया जाता है।
8. आरती करें
पूजा के अंत में मां दुर्गा की आरती करें और परिवार के सभी सदस्य श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करें।
शारदीय नवरात्रि में नौ देवियों की पूजा
नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। इन्हें नवदुर्गा कहा जाता है।
| दिन | देवी का स्वरूप |
|---|---|
| पहला दिन | मां शैलपुत्री |
| दूसरा दिन | मां ब्रह्मचारिणी |
| तीसरा दिन | मां चंद्रघंटा |
| चौथा दिन | मां कूष्मांडा |
| पांचवां दिन | मां स्कंदमाता |
| छठा दिन | मां कात्यायनी |
| सातवां दिन | मां कालरात्रि |
| आठवां दिन | मां महागौरी |
| नौवां दिन | मां सिद्धिदात्री |
इन स्वरूपों की पूजा की विधि और संबंधित अनुष्ठानों में परिवार तथा क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार अंतर हो सकता है।
नवरात्रि में व्रत कैसे रखें?
नवरात्रि में कई लोग पूरे नौ दिनों तक व्रत रखते हैं, जबकि कुछ लोग केवल पहले और अंतिम दिन या अष्टमी/नवमी के दिन व्रत रखते हैं।
व्रत के दौरान सामान्य रूप से फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बने भोजन जैसी सामग्री का उपयोग किया जाता है। लेकिन व्रत का भोजन हर परिवार और क्षेत्र में अलग हो सकता है।
व्रत रखते समय ध्यान रखें
- अपनी क्षमता के अनुसार ही व्रत रखें।
- पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ लें, यदि आपकी व्रत-परंपरा इसकी अनुमति देती है।
- अत्यधिक तला-भुना भोजन खाने से बचें।
- बच्चों, बुजुर्गों और विशेष स्वास्थ्य आवश्यकताओं वाले लोगों के लिए कठोर व्रत उपयुक्त नहीं हो सकता।
- किसी विशेष स्वास्थ्य स्थिति में चिकित्सकीय सलाह को प्राथमिकता दें।
नवरात्रि का उद्देश्य केवल भोजन पर नियंत्रण नहीं, बल्कि संयम, पूजा, ध्यान और आध्यात्मिक अनुशासन से भी जुड़ा है।
नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ
दुर्गा सप्तशती को देवी उपासना की महत्वपूर्ण धार्मिक परंपराओं में माना जाता है। नवरात्रि में बहुत से भक्त इसका पाठ करते हैं।
यदि आप नियमित रूप से दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं तो अपनी परंपरा के अनुसार संकल्प, पाठ और समापन की विधि का पालन कर सकते हैं।
जिन लोगों को पूरी सप्तशती का पाठ करने का अनुभव नहीं है, वे किसी जानकार पंडित या धार्मिक मार्गदर्शक से विधि समझ सकते हैं।
महाष्टमी पर कन्या पूजन कैसे करें?
महाष्टमी या महानवमी के अवसर पर कई परिवार कन्या पूजन करते हैं। इसमें छोटी कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनका सम्मान किया जाता है। परिवार की परंपरा के अनुसार उनके पैर धोकर, तिलक लगाकर, भोजन कराया जाता है और उन्हें दक्षिणा या उपहार दिया जाता है।
कन्या पूजन की संख्या और विधि अलग-अलग परंपराओं में अलग हो सकती है। इसलिए अपने परिवार की परंपरा के अनुसार इसे करना उचित है।
महानवमी पर हवन
महानवमी के दिन कई परिवार नवरात्रि पूजा के समापन अवसर पर हवन करते हैं। हवन में अग्नि प्रज्वलित करके निर्धारित सामग्री और मंत्रों के साथ आहुति दी जाती है।
यदि आपको हवन की विधि का अनुभव नहीं है, तो किसी योग्य पंडित से विधिपूर्वक हवन करवाना बेहतर हो सकता है। घर पर हवन करते समय अग्नि सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें और ज्वलनशील वस्तुओं को पूजा स्थान से दूर रखें।
नवरात्रि में पूजा, पाठ और धार्मिक परंपराएं
नवरात्रि केवल घटस्थापना और आरती तक सीमित नहीं है। इन दिनों कई परिवार अपनी परंपरा के अनुसार अलग-अलग धार्मिक गतिविधियां करते हैं।
- देवी मंत्र का जाप
- दुर्गा चालीसा का पाठ
- दुर्गा सप्तशती का पाठ
- अखंड ज्योति
- कन्या पूजन
- हवन
- भजन और कीर्तन
- सात्त्विक भोजन
- दान और सेवा
- मंदिर दर्शन
धार्मिक उपाय और हिंदू परंपराओं से जुड़ी सामान्य जानकारी के लिए हमारी हिंदू धर्म के टोटके और उपाय वाली जानकारी भी देख सकते हैं।
घर पर पूजा करें या पंडित से करवाएं?
घर पर सामान्य पूजा करना कई परिवारों के लिए सुविधाजनक होता है। लेकिन यदि घटस्थापना, दुर्गा सप्तशती पाठ, हवन या कोई विशेष अनुष्ठान विधिपूर्वक करवाना चाहते हैं, तो अनुभवी पंडित की सहायता ली जा सकती है।
पंडित से पूजा करवाते समय पहले ही यह स्पष्ट कर लेना अच्छा रहता है कि पूजा में कौन-कौन से अनुष्ठान शामिल होंगे, सामग्री कौन उपलब्ध कराएगा, पूजा का समय क्या रहेगा और दक्षिणा/सेवा शुल्क की क्या व्यवस्था होगी।
Online Puja और Pandit Booking की सुविधा
अगर आप अपने घर पर पूजा करवाना चाहते हैं लेकिन आपके शहर में उपयुक्त पंडित उपलब्ध नहीं हैं, तो ऑनलाइन पूजा की सुविधा भी एक विकल्प हो सकती है।
Online Puja Booking: Ayodhya and Kashi के माध्यम से पूजा संबंधी जानकारी और उपलब्ध पंडित विकल्पों के बारे में जाना जा सकता है। हिंदी और अंग्रेजी में पूजा संबंधी सहायता की आवश्यकता रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं।
महत्वपूर्ण: BookAyodhyaKashi एक facilitation platform के रूप में जानकारी और संपर्क सुविधा उपलब्ध कराता है। पूजा की अंतिम व्यवस्था, समय, सामग्री, दक्षिणा और अन्य विवरण संबंधित पंडित/सेवा प्रदाता से पहले स्पष्ट कर लेना चाहिए।
नवरात्रि में अन्य पूजा करवाना चाहते हैं?
नवरात्रि के दौरान यदि आप किसी अन्य धार्मिक अनुष्ठान की भी योजना बना रहे हैं, तो संबंधित जानकारी पहले से देख लेना उपयोगी हो सकता है।
अगर नवरात्रि के दौरान रुद्राभिषेक करवाना चाहते हैं, तो हमारी रुद्राभिषेक विधि और पूजा की जानकारी देख सकते हैं।
दुर्गा पूजा 2026 की आसान Checklist
नवरात्रि शुरू होने से पहले यह छोटी checklist देख लें:
- पूजा स्थान की सफाई
- मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र
- कलश
- नारियल और पत्ते
- जौ और मिट्टी, यदि परंपरा में हो
- रोली, कुमकुम और अक्षत
- फूल और माला
- धूप और दीपक
- कपूर
- फल और भोग
- पूजा की थाली
- व्रत की आवश्यक सामग्री
- अष्टमी/नवमी के लिए कन्या पूजन की तैयारी
- हवन करना हो तो हवन सामग्री
- पूजा पंडित से करवानी हो तो समय पहले तय करें
दुर्गा पूजा 2026 से जुड़े सामान्य सवाल
दुर्गा पूजा 2026 कब शुरू होगी?
2026 में शारदीय नवरात्रि और घटस्थापना 11 अक्टूबर 2026, रविवार से शुरू होगी। वाराणसी के लिए इसी दिन घटस्थापना का मुख्य मुहूर्त सुबह 5:54 बजे से 9:48 बजे तक है।
2026 में घटस्थापना का मुहूर्त क्या है?
वाराणसी के अनुसार 11 अक्टूबर 2026 को घटस्थापना का मुख्य मुहूर्त सुबह 5:54 बजे से 9:48 बजे तक है। अभिजित मुहूर्त सुबह 11:21 बजे से दोपहर 12:08 बजे तक है। स्थानीय शहर के अनुसार समय अलग हो सकता है।
क्या घटस्थापना सुबह ही करनी चाहिए?
घटस्थापना के लिए प्रतिपदा तिथि के दौरान निर्धारित शुभ समय को प्राथमिकता दी जाती है। इसलिए अपने शहर के पंचांग के अनुसार स्थानीय मुहूर्त देखना बेहतर है।
क्या नवरात्रि में नौ दिन व्रत रखना जरूरी है?
नहीं। व्रत रखना व्यक्तिगत श्रद्धा, पारिवारिक परंपरा और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। कुछ लोग पूरे नौ दिन व्रत रखते हैं, जबकि कुछ लोग चुनिंदा दिनों में व्रत रखते हैं।
क्या घर पर दुर्गा पूजा की जा सकती है?
हां, सामान्य देवी पूजा घर पर श्रद्धापूर्वक की जा सकती है। विशेष अनुष्ठान, विस्तृत पाठ या हवन के लिए अनुभवी पंडित की सहायता लेना उपयोगी हो सकता है।
नवरात्रि में कन्या पूजन कब किया जाता है?
कई परिवार अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन करते हैं। सही दिन और विधि परिवार तथा स्थानीय परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।
क्या नवरात्रि में हवन करना जरूरी है?
हवन कई परिवारों में नवरात्रि के धार्मिक अनुष्ठान का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन इसकी विधि और आवश्यकता परिवार की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।
क्या नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जा सकता है?
हां। नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ देवी उपासना की प्रचलित परंपराओं में से एक है। यदि पूरी विधि की जानकारी न हो तो किसी जानकार पंडित से मार्गदर्शन लिया जा सकता है।
क्या वाराणसी का घटस्थापना मुहूर्त पूरे भारत में समान रहेगा?
नहीं। घटस्थापना का मुहूर्त स्थानीय सूर्योदय और पंचांग गणना पर निर्भर करता है। इसलिए वाराणसी का समय दूसरे शहरों में सीधे लागू नहीं करना चाहिए। उदाहरण के लिए 11 अक्टूबर 2026 को Navi Mumbai के लिए अलग समय दिया गया है।
दुर्गा पूजा 2026 के लिए अंतिम तैयारी
यदि आप घर पर नवरात्रि पूजा की तैयारी कर रहे हैं, तो सबसे पहले अपने शहर का स्थानीय पंचांग देखकर घटस्थापना का समय तय करें। इसके बाद पूजा स्थान, कलश, देवी प्रतिमा या चित्र, पूजा सामग्री और भोग की तैयारी कर लें।
यदि अष्टमी या नवमी पर कन्या पूजन या हवन करना है, तो उसके लिए आवश्यक सामग्री और समय पहले से तय करना उपयोगी रहेगा। विशेष अनुष्ठान के लिए अनुभवी पंडित से विधि की पुष्टि भी की जा सकती है।
महत्वपूर्ण जानकारी
नवरात्रि और दुर्गा पूजा की तिथियां तथा पूजा के मुहूर्त पंचांग और स्थान के अनुसार बदल सकते हैं। विशेष रूप से घटस्थापना का समय स्थानीय सूर्योदय और शहर की पंचांग गणना पर निर्भर करता है।
इस लेख में दिया गया मुख्य घटस्थापना समय वाराणसी के लिए है। इसे पूरे भारत या विदेश में समान समय न माना जाए। अपने शहर के स्थानीय पंचांग से अंतिम मुहूर्त की पुष्टि करें।
पूजा की विधि, व्रत, मंत्र, हवन, कन्या पूजन और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में परिवार तथा क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार अंतर हो सकता है। किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान के लिए अपने परिवार के पुरोहित या योग्य धार्मिक विद्वान की सलाह को प्राथमिकता दें।
स्रोत और लेखकीय पारदर्शिता
इस लेख में 2026 की शारदीय नवरात्रि और घटस्थापना की तिथि तथा वाराणसी के मुहूर्त की जानकारी के लिए स्थानीय पंचांग गणना को आधार बनाया गया है। वाराणसी के लिए 11 अक्टूबर 2026 की घटस्थापना, 5:54 AM–9:48 AM का मुख्य मुहूर्त और 11:21 AM–12:08 PM का अभिजित मुहूर्त Drik Panchang के 2026 डेटा से सत्यापित किया गया है।
लेखक: Kumar Shailesh
वेबसाइट: BookAyodhyaKashi.com
इस लेख का उद्देश्य श्रद्धालुओं को शारदीय नवरात्रि और दुर्गा पूजा से जुड़ी सामान्य, व्यावहारिक और उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराना है। अंतिम धार्मिक निर्णय अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार लें।